एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण:-
कोई भी व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति का एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किसी से भी नहीं किया जाना है, न ही कोई एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण के लिए मजबूर कर सकता है।
एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण निम्न स्थिति में किया जा सकता हैः-
1. यदि न्यायाळय द्वारा आदेष हो कि किसी व्यक्ति का एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण की सूचना मामले में मुद्दों के निर्धारण हेतु न्यायहित में आवष्यक है।
2. कोई भी व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति का एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किसी से भी नहीं किया जाना है, न ही कोई एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण के लिए मजबूर कर सकता है। यदि संबंधित व्यक्ति का लिखित सहमति, जो रिकार्ड में हो तो उस स्थिति में लिखित संबंधित व्यक्ति से ही एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
3. निम्न स्थिति में लिखित सहमति, जो रिकार्ड में हो की आवष्यकता नहीं है:-
1. यदि स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला व्यक्ति दूसरे स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला व्यक्ति व अन्य व्यक्ति जो आवष्यक सेवा, इलाज, काउंसलिंग, आदि दे रहें हों तो एसे व्यक्ति से इलाज आदि के लिए आवष्यक हो तो वहां संबंधित व्यक्ति से ही एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
2. यदि कोर्ट द्वारा आदेष हो कि किसी व्यक्ति का एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण की सूचना मामले में मुद्दों के निर्धारण हेतु न्यायहित में आवष्यक है, संबंधित व्यक्ति से ही एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
3. कानूनी कार्यवाही करने वाले व्यक्ति जहां उक्त कानूनी प्रकिया के लिए आवष्यक हो तो वहां संबंधित व्यक्ति से ही एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
4. यदि सांख्यिकीय या अन्य जानकारी जिससे व्यक्ति विषेष की जानकारी नहीं पता चले तो संबंधित डाटा हेतु एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
5. केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों से निगरानी, विकास या एच आई. वी. के साथ जी रहे लोगों के लिए किसी प्रकार का पाॅलिसी या हित का कार्य हेतु एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण एच आई. वी. के साथ जी रहे व्यक्ति के जीवनसाथी, रिष्तेदार या सेवा देने वाले व्यक्ति को निम्न स्थिति में काउंसलर या चिकित्सक द्वारा किया जा सकता हैः-
1. जीवनसाथी रिष्तेदार या सेवा देने वाले व्यक्ति को एच आई. वी. से संक्रमित हो सकने की संभावना से बचने के लिए एच आई. वी. के साथ जी रहे व्यक्ति के हित के लिए, व अन्य संक्रमण से बचाने के लिए एच आई. वी. स्थिति का प्रकटीकरण किया जा सकता है।
2. जीवनसाथी रिष्तेदार या सेवा देने वाले व्यक्ति की परार्मष व एच आई. वी. के साथ जी रहे व्यक्ति की परार्मष आवष्यक है ताकि उनके हित में कार्य किया जा सके।